राजस्थान में 500 करोड़ की साइबर ठगी का भंडाफोड़: व्हाट्सएप ग्रुप से फंसाते थे निवेशक, पुणे से मास्टरमाइंड गिरफ्तार

राजस्थान में 500 करोड़ की साइबर ठगी का भंडाफोड़: व्हाट्सएप ग्रुप से फंसाते थे निवेशक, पुणे से मास्टरमाइंड गिरफ्तार

जयपुर। राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने देशभर में फैले एक बड़े ऑनलाइन निवेश घोटाले का पर्दाफाश करते हुए करीब 500 करोड़ रुपये की साइबर ठगी से जुड़े नेटवर्क का खुलासा किया है। पुलिस ने इस मामले के कथित मास्टरमाइंड को महाराष्ट्र के पुणे से गिरफ्तार किया है। आरोपी पर फर्जी लोन कंपनियों और म्यूल बैंक खातों के जरिए करोड़ों रुपये की ठगी को अंजाम देने का आरोप है।

पुलिस के अनुसार गिरोह सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से लोगों को शेयर बाजार और ऑनलाइन ट्रेडिंग में मोटा मुनाफा कमाने का झांसा देता था। शुरुआत में निवेशकों का भरोसा जीतने के लिए उन्हें कुछ रकम लाभ के रूप में लौटाई जाती थी। इसके बाद जब लोग बड़ी रकम निवेश कर देते थे तो आरोपित पैसे निकालकर ग्रुप बंद कर देते और संपर्क खत्म कर देते थे।

मामले का खुलासा उस समय हुआ जब एक पीड़ित ने करीब 16 लाख रुपये की ऑनलाइन ठगी की शिकायत दर्ज कराई। जांच के दौरान पुलिस ने ‘105 IND STOCKS ADV’ नामक व्हाट्सएप ग्रुप, बैंक खातों और मोबाइल नंबरों का तकनीकी विश्लेषण किया। जांच में सामने आया कि इसी नेटवर्क के जरिए देशभर के हजारों लोगों को निशाना बनाया गया और लगभग 500 करोड़ रुपये की ठगी की गई।

पुलिस जांच में यह भी पता चला कि आरोपी कथित रूप से ग्रेस फाइनेंस, पॉजिटिव बैलेंस और गुरु फाइनेंस जैसे नामों से फर्जी लोन कंपनियां संचालित कर रहा था। लोन दिलाने के नाम पर लोगों से आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक दस्तावेज लिए जाते थे। बाद में उन्हीं दस्तावेजों का इस्तेमाल कर बैंक खाते खोले जाते थे, जिन्हें साइबर अपराध की भाषा में ‘म्यूल अकाउंट’ कहा जाता है।

ठगी से प्राप्त धनराशि को हवाला और क्रिप्टोकरेंसी नेटवर्क के जरिए विभिन्न खातों में स्थानांतरित किया जाता था ताकि जांच एजेंसियों को गुमराह किया जा सके। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों और वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही है।

साइबर क्राइम अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्हाट्सएप ग्रुप, सोशल मीडिया विज्ञापन या निवेश योजना के झांसे में न आएं और निवेश करने से पहले संबंधित कंपनी की प्रामाणिकता अवश्य जांच लें।